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बाबा खाटू श्याम जन्मदिन : Baba Khatu Shyam Birthday

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श्याम बाबा (Khatu Shyam Baba) का जन्मदिवस पंचांग के अनुसरा, देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन मनाया जाता है. यह तिथि आज 23 नवंबर 2023 के दिन है. यानी आज खाटू श्याम बाबा ( Khatu Shyam Baba Birthday ) का जन्मदिवस मनाया जा रहा है. श्याम बाबा के जन्मदिन के खास मौके पर आप अपनों को बधाई दे सकते हैं. आइये आपको श्याम बाबा के जन्मदिवस (Khatu Shyam Birthday Wishes) के लिए खास शुभकामना संदेश के बारे में बताते हैं।  हिन्दू पंचांग के अनुसार श्री खाटू श्याम जी की जयंती प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसी दिन देवउठनी एकादशी भी पड़ती है। इस दिन श्री खाटू श्याम जी की विधिवत पूजा के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के भोग भी अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि श्री खाटूश्याम जी भगवान कृष्ण के कलियुगी अवतार हैं। राजस्थान के सीकर में श्री खाटू श्याम की भव्य मंदिर स्थापित है। मान्यता है कि यहां भगवान के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है। कौन थे श्री खाटू श्याम जी? शास्त्रों के अनुसार श्री खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। वे पांडु के पुत्र भीम के पौत्र...

मां संतोषी की पूजा महत्व और माँ संतोषी को संतोष देवी क्यों कहा जाता है

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  एक बार गणेश जी ने अपनी पुत्री की परीक्षा लेने के लिए कुबेर देव को बुलाया और उन्हें एक घट धन रखने का कहा दिया। उनकी पुत्री ने उस घट को छु दूर तरफ़ उसे देखा तक नहीं। जिससे भगवान गणेश ने अपनी पुत्री का नाम संतोषी रखा और उन्हें संतोष की देवी बना दिया।संतोषी माता हिंदू धार्मिक मान्यताओं की देवी हैं जिनका शुक्रवार का व्रत किया जाता है। संतोषी माता पिता का नाम गणेश और  रिद्धि-सिद्धि है। और उसे दो भाई शुभ और लाभ थे | संतोषी माता के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों और ज्ञान से भरा पूरा परिवार है। इसलिए उनको प्रसन्न करने से फल मिलता है कि वो परिवार में सुख-शांति और मनोंकामनाओं को पूरा शोक, विपत्ति, चिंता परेशानियों को दूर कर देती हैं।  संतोषी माता को सभी इच्छाओं को पूरा करके संतोष प्रदान करने वाली देवी माँ के रूप में जाना जाता हैं. उनके नाम का भी यही अर्थ हैं। यह विघ्नहर्ता श्री गणेश की बेटी हैं, जो सभी दुखों और परेशानियों को हर लेती हैं। भक्तों के दुर्भाग्य को दूर करती हैं और उन्हें सुख एवं समृद्धि से प्रदान करती हैं। इनका पूजा अर्चना उत्तरी ...

संतोषी माता की फैमिली ट्री, और संतोषी माँ की व्रत की पूजा विधि और पाइए माँ सातोशी विशेष कृपा

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भगवान गणेश ने अपनी शक्तियों से एक ज्योति उत्प‍न्न की और उनकी दोनों पत्नियों की आत्मशक्ति के साथ उसे सम्मिलित कर लिया। इस ज्योति ने कन्या का रूप धारण कर लिया और गणेशजी की पुत्री का जन्म हुआ जिसका नाम संतोषी रखा गया। एक बार गणेश जी ने अपनी पुत्री की परीक्षा लेने के लिए कुबेर देव को बुलाया और उन्हें एक घट धन रखने का कहा दिया। उनकी पुत्री ने उस घट को छु दूर तरफ़ उसे देखा तक नहीं। जिससे भगवान गणेश ने अपनी पुत्री का नाम संतोषी रखा और उन्हें संतोष की देवी बना दिया।संतोषी माता हिंदू धार्मिक मान्यताओं की देवी हैं जिनका शुक्रवार का व्रत किया जाता है। संतोषी माता पिता का नाम गणेश और  रिद्धि-सिद्धि है। और उसे दो भाई शुभ और लाभ थे | संतोषी माता के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों और ज्ञान से भरा पूरा परिवार है। इसलिए उनको प्रसन्न करने से फल मिलता है कि वो परिवार में सुख-शांति और मनोंकामनाओं को पूरा शोक, विपत्ति, चिंता परेशानियों को दूर कर देती हैं।                     मां संतोषी ,संतोष की देवी हैं। मां स...

बृहस्पति पूजा ऐसे करने से होगी असीम कृपा और बनेगे बिगड़े काम

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धर्म डेस्क। गुरु बिना ज्ञान को पाना असंभव होता है। सौर मंडल में यदि गुरु की बात की जाए तो यह सूर्य के बाद सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है। इसलिये गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति को माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। जन्मपत्री में अगर गुरु कमजोर है तो व्यक्ति को कई प्रकार के कष्ट भुगतने पड़ते हैं। वह न तो धन कमा पाता है, न ही उसे वैवाहिक जीवन का सुख मिलता है।  इसलिए कुंडली में गुरु को होना जरूरी है । शिक्षक दिवस के मौके पर नक्षत्रों के गुरु बृहस्पति का बखान। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु/बृहस्पति की मित्रता सूर्य, मंगल, चंद्र से हैं, वहीं शुक्र और बुध इनके शत्रु ग्रह और शनि और राहु सम ग्रह हैं। पुराणों के अनुसार बृहस्पति समस्त देवी-देवताओं के गुरु हैं। वे महर्षि अंगिरा के पुत्र हैं। उनकी माता का नाम सुनीमा है। इनकी बहन का नाम योग सिद्धा है।                              गुरुवार की पूजा विधि-विधान के की जानी चाहिए. व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नना करना चाहिए बृहस्पति देव का पूजन प...

गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती तुलसी और गणेश जी क्यों दिया तुलसी को श्राप आइए जानिए

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धर्म डेस्क। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कोई भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान श्री गणेश जी पूजा की जानी जरूरी है। बुधवार के दिन भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। भगवान गणेश भक्तों पर प्रसन्न होकर उनके दुखों को हरते हैं भगवान गणेश खुद रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता हैं। वह भक्‍तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष और दरिद्रता को दूर करते हैं। शास्‍त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश जी की विशेष पूजा का दिन बुधवार है। लेकिन प्रथम पूज्य गणपति भगवान को तुलसी अर्पित करना या उनके भोग में शामिल करना वर्जित माना जाता है।  पौराणिक कथा के अनुसार एक बार गणपति जी गंगा किनारे तपस्या कर रहे थे। वहाँ गंगा तट पर धर्मात्मज कन्या तुलसी भी अपने विवाह के लिए तीर्थयात्रा कर रही थी। गणेश जी सिंहासन पर बैठे हुए थे और चंदन का लेपन के साथ उनके शरीर पर अनेक रत्न जड़ित हार और गले में उनके स्वर्ण-मणि रत्न पड़े हुए थे और कमर पर रेशम का पीताम्बर लिपटा हुआ था। उनकी छवि बेहद मनमोहक लग रही थी। तपस्या में विलीन गणेश जी को देख तुलसी का मन उनके प्रति आकर्षित हो गया। उन्होंने तपस्या भंग के दी और गणपति जी को तपस्या से उठा कर...

बुधवार का दिन भगवान गणेश जी पूजा क्यों की जाती है , और गणेश जी की पूजा कैसे करनी चाहिए. जिससे होगी गणेश जी कृपा |

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शास्त्रों में बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेशजी का माना जाता है। इसके अनुसार,माता पार्वती की कृपा से जब बाल गणेश की उत्पत्ति हुई थी,तब उस समय भगवान शिव के धाम कैलाश में बुध देव उपस्थित थे। बुध देव की उपस्थिति के कारण श्रीगणेश जी की आराधना के लिए वह प्रतिनिधि वार हुए यानी बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा का विधान बन गया। शुद्ध आसन पर बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, गणेशजी को सूखे सिंदूर का तिलक लगाएं और इनकी आरती करें।भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी है. ऐसा माना जाता है कि विनायक को दूर्वा अत्यंत प्रिय है. 3 या 5 पत्तियों वाली दूर्वा को सबसे उत्तम माना जाता है. दूर्वा चढ़ाने से गणपति जी प्रसन्न होते हैं अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः नामक मंत्र का जाप करना चाहिए।  भगवान गणेश को मोदक अति प्रिय मोतीचूर के लड्डू भी बेहद ही पसंद हैं. ऐसे में आप गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को मोदक के लड्डू या मोतीचूर के लड्डू जरूर चढ़ाएं. शास्‍त्रों में बुधवार को गाय की सेवा करना परमपुण...

बुधवार कार्तिक कृष्ण पक्ष नवमी, 19 अक्टूबर 2022 का इस दिन शुभ कार्य भी कर सकते हैं

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हिंदू धर्म में हर शुभ काम अच्छा मुहूर्त देखकर किया जाता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार अशुभ समय में किए काम मनचाहा परिणाम नहीं देते। यही कारण है कि पंचक में बहुत से शुभ काम करने की मनाही है।  पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। कार्तिक मास का दूसरा बुधवार है। मान्यता के मुताबिक बुधवार के दिन खास तौर पर शिवजी और माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना का की जाती है। श्री गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। गणपति जी प्रथम पूज्य देवता हैं। इसलिए किसी भी शुभ काम की शुरुआत बिना इन्हें याद किये नहीं की जाती है।मान्यता है कि गणेश जी  के आशिर्वाद से किसी भी काम में विघ्न नहीं पड़ता है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। जीवन...

बुधवार को विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा करने बन सकते बिगड़े काम | जानें इस दिन व्रत करने के नियम और फायदे

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बुधवार दिन श्री गणेश की पूजा-अर्चना की जाती  है। आखिर गणेश जी की पूजा के लिए विशेष दिन के तौर पर बुधवार ही क्यों है।हिन्दू धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता या देवी को पूजा की जाती  है, उस दिन उस देवता या देवी की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है।और अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं तथा उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। उस विशेष दिन के लिए खास ज्योतिषीय उपाय भी होते हैं, जिनको करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बुधवार के दिन माता पार्वती और भगवान शिव छोटे पुत्र श्री गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। आखिर गणेश जी की पूजा के लिए विशेष दिन के तौर पर बुधवार ही क्यों है। इसके बारे में जानने के लिए हमें गणेश जी की जन्म  समय की कथा जाननी जरुरी है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती की कृपा से जब श्री गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी, तब उस समय भगवान शिव के धाम कैलाश में बुध देव उपस्थित थे। बुध देव की उपस्थिति के कारण  श्रीगणेश जी की आराधना के लिए वह प्रतिनिधि वार हुए यानी बुधवार के दिन गणेश जी पूजा का विधान बन गया। हिंदू धर्म  प्रत्येक दिन अलग-अल...

गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने वाले की सभी मुरादें होती है पूरी , जानें इसका उद्देश

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गोवर्धन पूजा के लिए कहा गया है कि इस दिन श्रीकृष्ण ने तूफान और बारिश से गांववासियों की रक्षा करने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था. दीपावली के त्योहार के एक दिन बाद शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है. इस दिन लोग श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं. साथ ही उन्हें ढेरों व्यंजनों का भोग लगाते हैं. इसके अलावा इस दिन गायों की पूजा करने की भी महत्व है. गोवर्धन पूजा को अन्‍नकूट के नाम से भी जाना जाता है. गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाने की मान्यता के साथ इस दिन गोवर्धन की परिक्रमा करने की परंपरा भी प्रचलित है.         संपूर्ण गोवर्धन की परिक्रमा महत्व  :- परिक्रमा शुरू करने से पहले परिक्रमा मार्ग के किसी भी एक मंदिर में पूजा करके ही आरम्भ करें और इसे जब खत्म करें तो वापस उसी मंदिर में लौट के आ जाएं .( 7 कोस ) 21 किलोमीटर की होती है जो कि मानसी गंगा से प्रारंभ की जाती है इसके मार्ग में पड़ने वाले कई महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है इनमें दान घाटी , मानसी गंगा , अभय चक्रेस्वर मंदिर , सुरभी कुंड , कुशुम सरोवर, पूछरी का लोटा , जत...

भाई दूज का त्योहार, क्यों मनाया और क्या है इसका महत्व

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रक्षाबंधन के अलावा भाई-बहन के प्यार का प्रतीक त्योहार  साल में दो बार मनाया जाता है. साल के दो बार भाई -बहन त्योहार होता है  दिवाली के बाद भाई दूज होता है. इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं   Bhai Dooj2022 :-इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं. उनमें से एक देवी यमुना या यामी और उनके भाई यमराज के बीच की कथा है. इस  दिन को यम द्वितीया (Yam Dwitiya) भी कहते हैं.ऐसा बताते हैं कि देवी यामी अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थी. एक बार वे काफी समय से नहीं मिले थे कि अचनाक दिवाली बाद वे यामी से मिलने पहुंच गए.उस दिन से ही भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।  इस दिन बहन अपने  भाई के घर जाते हैं और बहन अपने हाथों से माथे पर तिलक लागती हैं. खुशी में यामी ने तरह -तरह  तरह के पकवान बनाए और भाई यम के माथे पर तिलक किया. इससे वे बहुत खुश हो गए और उन्होंने यामी से कुछ मांगने को कहा. इस पर यामी ने अपने भाई से कहा कि वे चाहती हैं कि यम हर साल उनसे मिलने आएं और आज के बाद जो भी बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करे उसे यमराज का भय न रहे क्योंक...

दिवाली की पूजा पर माँ लक्ष्मी विशेष कृपा

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दिवाली का त्योहार शुरू होने में महज कुछ समय बचा है  धनतेरस और दिवाली पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए लोग उनकी पूजा करते हैं  धनतेरस घर में किसी  विशेष  वस्तु की खरीदारी कि जाती है ,और कई तरह के उपाय भी करते हैं. आइए जानिए हैं कि ऐसे कौन से काम हैं, जिनको करने से मां लक्ष्मी कृपा  होती हैं, कमल गट्टे की माला खरीद लें और उसी माला से मां लक्ष्मी का जाप करें, रोज समय न मिले तो प्रत्येक शुक्रवार को ही कर लें माँ लक्ष्मी माता आपसे प्रसन्न रहेंगी.इस दिवाली से घरों में रोजाना सुबह-शाम भगवान की माँ लक्ष्मी जी की आरती का नियम बना लें. जिन घरों में घर में सुबह-शाम को भगवान की आरती होती है, दीपक जलता है, उनसे माता लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं.जो ग्रहणी गाय के प्रति श्रद्धा भाव रखती हैं और भोजन बनाते समय भोग निकालती हैं. गाय के लिए  हरे चारे का प्रबंध करती हैं मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिन घरों में अनाज का आदर होता वहां पर वहां लक्ष्मी जी विशेष कृपा रहती है घरों में अनाज का अनादर न करें. जितनी भूख और क्षमता हो, उतना बनाएं और खाएं. माँ लक्ष्मी जी को प्र्शन्...

वास्तु टिप्स: दिवाली की पूजा ऐसे करने से होगी माँ लक्ष्मी विशेष कृपा

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दिवाली का त्योहार शुरू होने में महज कुछ समय बचा है  धनतेरस और दिवाली पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए लोग उनकी पूजा करते हैं  धनतेरस घर में किसी  विशेष  वस्तु की खरीदारी कि जाती है ,और कई तरह के उपाय भी करते हैं. आइए जानिए हैं कि ऐसे कौन से काम हैं, जिनको करने से मां लक्ष्मी कृपा  होती हैं, कमल गट्टे की माला खरीद लें और उसी माला से मां लक्ष्मी का जाप करें, रोज समय न मिले तो प्रत्येक शुक्रवार को ही कर लें माँ लक्ष्मी माता आपसे प्रसन्न रहेंगी. इस दिवाली से घरों में रोजाना सुबह-शाम भगवान की माँ लक्ष्मी जी की आरती का नियम बना लें. जिन घरों में घर में सुबह-शाम को भगवान की आरती होती है, दीपक जलता है, उनसे माता लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं. जो ग्रहणी गाय के प्रति श्रद्धा रखती हैं और भोजन बनाते समय भोग निकालती हैं. गाय के लिए कभी-कभी हरे चारे का प्रबंध करती हैं मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिन घरों में अनाज का आदर होता वहां पर वहां लक्ष्मी जी विशेष कृपा रहती है घरों में अनाज का अनादर न करें. जितनी भूख और क्षमता हो, उतना बनाएं और खाएं. माँ लक्ष्मी जी को प्र्शन्...

Diwali 2022: इस दिवाली इस अनुसार करें खरीदारी, मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसेगी

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Diwali 2022: दिवाली का त्योहार कुछ दिन दूर है। सब लोग व्यस्त हैं। घर में साफ-सफाई से लेकर खरीदारी में लगे हैं। दीपावली का पर्व घर में नई चीजें लेकर आता है। दिवाली पर राशि के अनुसार शॉपिंग करना फायदेमंद होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे भाग्य बदल जाता है। वहीं माता लक्ष्मी की कृपा जातकों पर बरसने लगती है। आइए जानते हैं कि इस दिवाली कौन सी चीजें खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा। दिवाली पर सोना, चांदी या हीरे से जुड़ी चीजें खरीदनी चाहिए। इस दिवाली चांदी का सामान खरीदना चाहिए। इससे आपको फायदा होगा। बजट के अनुसार इस दिवाली चांदी का कुछ भी सामान खरीदें। यह आपके लिए ज्योतिषीय रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। दिवाली पर सोने के आभूषण खरीदने चाहिए। यदि आप घर में चांदी का गणेश लाते हैं, तो यह आपको लाभ देगा। लोगों को इस दिवाली श्री यंत्र खरीदना चाहिए। इससे आपको महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी। आप चांदी का कलश या शिव पार्वती की चांदी की मूर्ति भी खरीद हैं। इन चीजों को घर लाना भी आपके लिए शुभ रहेगा। दीपावली के मौके पर गोल्ड खरीदना अच्छा माना जाता है। दिवाली के दिन सोने के सिक्के और आभूषण खरीदना फायद...

20 मार्च को होलिका दहन और 21 को खेली जाएगी होली, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

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होली के पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि 20 मार्च को होलिका दहन होगा। जबकि  रंगों का त्योहार होली 21 मार्च को है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका दहन के दिन भद्रा दशा होने से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 9:01 बजे से मध्यरात्रि 12:20 बजे तक रहेगा। भद्रा की दशा फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि 20 मार्च को सुबह 10 बजकर 40 मिनट से रात 8 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन भद्रा में करना अशुभ माना जाता है। इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 20 मार्च को रात नौ बजकर एक मिनट से रात के 12 बजकर 24 मिनट तक है। जबकि पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 10 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 21 मार्च को सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। पूजन विधि और महत्व होलिका दहन के दिन होलिका की पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत रखकर हल्दी का टीका लगाकर सात बार होलिका की परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं। आचार्य डा. रमेश पांडेय ने बताया कि होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि के साथ-साथ संतान का विशेष महत्व है। आपको ये आर...

आखिर क्यों होलाष्टक के समय नही होते है कोई मांगलिक कार्य

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मित्रों इस बार होली 21 मार्च को है। कहते है होली से 8 दिन पहले ही होलाष्टक लग जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार होलाष्टक के समय कोई भी शुभ कार्य नही किये जाते है। आइये जाने क्यों ? ऐसा माना जाता है हरिण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का बहुत प्रयास किया। फिर उसने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को मारने के लिए भेजा। तब भगवान विष्णु ने 8 दिनों तक प्रहलाद की रक्षा की थी। इसी कारण से होली के 8 दिन पहले अशुभ माने जाते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होली से पहले तक ग्रहों की स्थिति अशुभ स्थान पर होती है इस कारण कोई भी शुभ कार्य पूरी तरह से निषेध माना जाता है। इन आठ दिनों में कोई भी हिन्दू धर्म का विवाह मुहूर्त, ग्रह प्रवेश या हवन नही होता। पोस्ट को लाइक और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। हर रोज एस्ट्रोलॉजी से जुड़ी ताजा खबरों से अपडेट करने के लिए हमें फॉलो करें।

जानें क्या हुआ जब कृष्ण की प्रेमिका राधा और उनकी पत्नी रुक्मिणी का हुआ आमना सामना

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नमस्कार दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते है कि भगवान श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मिणी जी के साथ हुआ था परंतु श्रीकृष्ण के साथ राधा का नाम अजर अमर है। आप किसी भी चित्र को देखेंगे तो राधा कृष्ण का चित्र ही नजर आता है। और सामान्यतः जो भी मंदिर है वहां राधा कृष्ण की ही पूजा होती है। आज हम भगवान कृष्ण, राधा और रुक्मिणी से जुड़ी हुई कथा बताने जा रहे है। एक समय की बात है सूर्य ग्रहण हो रहा था तभी नंद बाबा, यशोदा के संग राधा कुरुक्षेत्र पधारे। यहां हम आपको बता दे कि उस समय श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह हो चुका था । जब रुक्मिणी की नजर राधा पर गयी तो वे राधा के सौंदर्य को देखकर दंग रह गयी। और जलन के मारे राधा को कुछ ज्यादा ही गर्म दूध पीने को दे दिया। ऐसा करने के पश्चात रुक्मिणी श्रीकृष्ण के कक्ष में गयी। वहां उन्होंने देखा कि श्रीकृष्ण के हाथ जले हुए थे। जब रुक्मिणी ने इसका कारण पूछा तब श्रीकृष्ण ने बताया कि तुमने को राधा को गर्म दूध दिया था उससे उसके हाथ जल गए और क्योकि राधा मेरे ह्रदय में वास करती है इसलिए मुझे भी उतनी ही तकलीफ हो रही है। यह देखकर रुक्मिणी को आत्मग्लानि होने लगी। और अपने इस ...

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जानिए माता सती का जन्म और विवाह कैसे हुआ